Desi Kahani Pintu aur Jadugar

Best Hindi Kahani Pintu aur Jadugar ki Desi Kahani

 

पिंटू एक मस्तमौला बच्चा था… वे दुनिया दारी से मस्त अपनी मस्ती में मस्त रहता था… लेकिन उससे क्या पता था कि उसकी जिंदगी में कुछ ऐसा घटने वाला है जो उसके सपनों में भी नहीं सोचा था।

एक दिन उसकी मां ने बुलाया…
मामी- पिंटू इधर आओ।
पिट्टू- जी माँ अभी आया
मामी – ये खाना जाक पिता जी को दे आओ या ध्यान रहे कोई गदबद नहीं होनी चाहिए वृन अच्छा नहीं होगा…
पिंटू – ठीक है मां..

पिंटू ध्यान से रास्ते में खाना लेकर जा ही रहा था कि तबी एक गया पांची पिता जी के खाने पर आ गिरा…या घबराहट में पिंटू से पिता जी का खाना जमीन पर गिर गया…

पिंटू ने जब हमें घायल पंछी को देखा तो उसकी पंछी की हाल देखी नहीं गई..
पिंटू पंछी को जल्दी से घर लेकर जाता है…
पिंटू घर पहुचते ही मां को सारी बात बताता है
पिंटू- मा में रास्ते में ध्यान से जा रहा था कि तब ये पांची पिता जी के खाने पर आ गिरा मां.. ये पंछी बहुत घायल है क्या हम इसे रख सकते हैं…

 

मां को भी पंछी पर तरस आ जाता है या मां पंछी को घर में रखना की अनुमति दे देती है..

या बहुत जल्दी पंछी की तबीयत पहले से ठीक हो जाती है…
पिंटू या पंछी की दोस्ती दिन ब दिन बढती जा रही थी…।

एक रात जब सब सो रहे थे, चारो या सन्नाटा था तबी पंछी को एक परछाई दिखी… वे दर कर जोर जोर से चिल्लाने लगा…
उसके गाल सुक्र पिंटू दौड़ा दौड़ा पंछी के पास आया…
पिंटू ने इधर उधर देखा पर उसे कुछ न दिखा…लकिन पंछी अभी भी दारा हुआ था
पिंटू – तुम तो यहां कोई नहीं है, हर जगह अच्छे से देखी है।
पिंटू जैसे ही मुद्दा है वेसे पीछे से आवाज बहुत है
पंछी- यहां जादूगर आया था…
पिंटू एक पल के लिए हेयरन हो गया…
पिंटू- क्या ये तुम्हारी आवाज थी।
पंछी – हा में कोई साधारण पंछी नहीं हूं…और वो परछाई या किसी की नहीं बालक जादूगर की थी..मेरी रानी जादूगर की कैद में है…
मैं तुम्हारा अभुत अभारी हूं कि तुमने मेरी जान बचाई… इसीलिये में तुम्हें एक वरदान देना चाहता हूं जिस्मे तुम मुझसे कुछ भी मांग सकती हो।
पिंटू- तो तुम मुझे ये बताओ कि मैं तुम्हें और तुम्हारी रानी को केसे बचा सकता हूं
पंछी- पर पिंटू वो जादूगर बहुत ताकतवार है
पिंटू- अभी तो तुमने कहा कि तुम मुझे वरदान दे सकते हो तो मुझे इतना ताकतवर बनाओ जिससे में जादूगर को हरा सकु
पंछी – ठीक है..
पंछी अपनी दिव्य शक्ति से पिंटू को बहुत शक्ति शाली बना देता है…
पिंटू अपनी शक्तियों से एक कालचक्र बुलाता है जिससे वे जादूगर की दुनिया में जा सके..

पिंटू या पंछी दोनो उस चक्र में प्रवेश करते हैं

पिंटू और पंछी जब वहा पहुचते हैं तो वहा बहुत अँधेरा होता है एक दम सन्नाटा… चारो और अजीब से उपलब्ध आ रही होती हैं..
लेकिन पंछी या पिंटू हिम्मत कर आगे बढ़ते हैं
पिंटू – कहा है ये जादूगर कहा छिपा है ये जादूगर

तबी जादूगर की जोर से हंसने की आवाजें आती हैं

पिंटू जोर से चिल्लाता है- आ जौडगर बहार आ कहा छिपा है हिम्मत है तो सामने क्या क्या करें की तरह चिपकर बताती है सामने तो आ

तबी जादूगर सामने आता है…
जादुगर- तो कैसा ही भिड़ोग आखिर आ ही गए अपुन के चांगुल में या मजा आया मजा आएगा पार्टी…
पिंटू – रानी कहा है
जादूगर- लो ईधरिक है तुम्हारी रानी…
रानी को बहरेमी से बंधा होता है रानी ना तो बोल पति है या ना ही हिल पति है…
रानी की हाल देख पिंटू या पंछी चौक जाते हैं

Hindi Kahani me romanch abhi baki hai

तबी पिंटू अपनी शक्तियो से एक जादूगर गोला निकलता है या जादूगर पर प्रहार करता है जैसे अफसोस जादू के ऊपर उसका असर नहीं होता है..
जादुगर को गुस्सा आता है या तभी वे अपनी शक्तियों से पिंटू पर प्रहार करता है…
पिंटू बच तो जाता है प्रांत जादूगर का हमला पिंटू को हिला कर रख देता है…
लेकिन पिंटू हार नहीं मानता…
पिंटू फिर से अपनी जादू शक्तियों से प्रहार करता है जैसे फिर जादूगर बच जाता है…

जादूगर का दूसरा प्रहार भी पिंटू को घायल कर देता है इतना कि पिंटू जमीन पर गिर जाता है
तबी पंछी पिंटू की हिम्मत जुटाता है या बोलता है कि पिंटू अपना धूमकेतु निकालो…

पिंटू आओनी पूरे जोश या शक्तियों से धूम केतु गोले को उत्पन्न करता है…
उस गोले को देखा ही जादूगर के होश उड़ जाते हैं
जब पिंटू धूमकेतु का प्रहार जादूगर पे करता है तो जादूगर वही ढेर हो जाता है जाता है

Moral of this Desi kahani :

वही “पाप का अंत हो जाता है”

 

अंत में पिंटू, पंछी या रानी अपनी दुनिया में वापस चले जाते हैं…

Best Hindi Kahani Pintu aur Jadugar ki Desi Kahani

Post navigation